ऑल इंडिया उच्च वर्ग बौद्ध समाज द्वारा प्रसारित एवं प्रचारित
ऑल इंडिया उच्च वर्ग बौद्ध समाज द्वारा प्रसारित एवं
प्रचारित
साथियो,
भारत में विलुप्त (नष्ट) होने वाले बुद्ध
धर्म के एतिहासिक धरोहर को सर्व प्रथम सुरक्षित करने का प्रयास श्रीलंका के पूज्य
बौद्ध भिक्षु अनागरिक धम्मपाल ने किया I उनके द्वारा सम्पूर्ण भारत में बुद्ध
विहारों को सहेज कर सुरक्षित करने का महान कार्य किया I जिसकी बदौलत आज हम उन
एतिहासिक धरोहर को देख पा रहे है I भारत में बुद्ध धर्म को नष्ट करने का काम
रुढ़िवादी हिन्दू और मुसलमान धर्म के राजाओ द्वारा किया गया I
जिस समय पूज्य बौद्ध भिक्षु अनागरिक धम्मपाल भारत आये थे I उस समय
यहाँ बुद्ध धर्म के लोगो का कोई अता पता नहीं था I केवल कुछ गिनती के बौद्ध भिक्षु
भारत में थे I
भारत में सम्राट आशोक के काल से लेकर आधुनिक काल तक बौद्ध धर्मिय
लोगो का कोई बौद्ध समाज नहीं था I केवल भिक्षु संघ था I उस समय बुद्ध धर्म को केवल
आध्यात्मिक धर्म के रूप में प्रचरित किया गया I बुद्ध के क्रांतिकारी सामाजिक
परिवर्तन के बारे में कभी प्रचार प्रसार नहीं किया गया I भारत में बुद्ध ने
समतामूलक समाज की स्थापना की नीव राखी I जन्म आधारित वर्ण व्यवस्था को उन्होंने
तहस नहस कर दिया था I
बुद्ध द्वारा चलाई गई सामाजिक क्रांति को फिर से भारत में स्थापित
करने वाले कानून के ज्ञाता बुद्धिस्ट डॉ बाबा साहेब आम्बेडकर ने कार्य किया I भारत
में बौद्ध समाज का न होना बुद्ध धर्म के पतन का मुख्य कारणों में से एक कारण था I
बुद्धिस्ट डॉ बाबा साहेब
आम्बेडकर द्वारा भारत देस में विधि का शासन स्थापित करने के लिए सविधान की रचना की
ओर उसी संवैधानिक अधिकारों के तहत उन्होंने 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में बुद्ध
धर्म की धर्मान्तरित दिक्षा लेकर भारत में बौद्ध समाज बनाने की नीव राखी I लेकिन
यह भारत के लोगो का दुर्भाग्य रहा है की बाबा साहेब का बौद्ध समाज बनाने का कार्य
अधुरा रह गया I
बुद्धिस्ट डॉ बाबा साहेब आम्बेडकर के आधुरे कार्य को 59 वर्षों के
बाद सम्पूर्ण भारत के विधिक (लीगल) बौद्धों ने, जिनका शासकीय, आर्ध शासकीय लिखित
रिकार्ड के अनुसार बौद्ध है I जो न अनुसूचित जाती, न जनजाति, ना दलित, ना पिछड़ा वर्ग,
जो भारत की जाती व्यवस्था, वर्ण व्यवस्था से ऊपर उठ जुके है I जो केवल मानव मात्र
के रूप में सम्पूर्ण भारत में आपनी पहचान स्थापित किये है I ऐसे बौद्ध लोगो ने
बुद्ध की जन्म स्थली बोध गया में दिनाँक 28/09/2015 को भाद्र पूर्णिमा के दिन
बौद्ध समाज की स्थापना किये I जिसे उच्च वर्ग बौद्ध समाज के नाम से जाना पहचाना
जाता है I सम्पूर्ण भारत में विधिवत बौद्ध समाज केवल उच्च वर्ग बौद्ध समाज है I
जिसका कार्य बुद्धिस्ट डॉ बाबा
साहेब आम्बेडकर के अनुसार भारत में जातिविहीन, वर्णविहीन बौद्ध समाज को संघठित
करने के लिए कार्य करना और मानव मात्र के कल्याण के लिये कार्य करना तथा भारत में
विधि का शासन स्थापित करने के लिये कार्य करना I बुद्धिस्ट डॉ बाबा साहेब आम्बेडकर
के अनुसार जाती का उन्मूलन (Annihilation
of Caste) कर जातिविहीन, वर्णविहीन बुद्ध धर्म को स्थापित
करना और बुद्धिस्ट बनकर उच्च वर्ग बौद्ध समाज को आगे बढ़ाना है I भारत में लुप्त
हुये बुद्ध धम्म को दुबारा बचाना है तो बुद्धिस्ट डॉ बाबा साहेब आम्बेडकर के आनुसार
विधिवत क़ानूनी धर्मान्तरण की प्रक्रिया पूर्ण कर उच्च वर्ग बौद्ध समाज में शामिल
होना आपना और भारत के सभी मानव समाज के कल्याण का कार्य करना है | बुद्धिष्ट डाँ बाबा साहेब आम्बेडकर द्वारा बनाये गये सविधान का पालन करते हुये
सम्पूर्ण भारत में बुद्ध धर्म के वास्तविक वारिस बनकर बौद्धों को सवैधानिक आधिकार
प्राप्त करने के लिए संघठित होकर संघर्ष करना होगा |
सावधान
किसी भन्ते द्वारा बुद्ध धर्म की दीक्षा लेकर 22
प्रतिज्ञा को बोलकर कोई बौद्ध नहीं हो सकता | अगर आप लोगो को बुद्धिष्ट डाक्टर
बाबा साहेब आम्बेडकर का थोडा भी सम्मान और स्वाभीमान है तो भारत के हर गली मोहल्ले
में जो बुद्ध धर्म का दिक्षा प्रमाण पत्र बाट रहे है उन राजनितिक नौटंकी करने वालो
से सावधान रहो | ये वे लोग है जो बाबा साहेब के जाती उन्मूलन समाज बनाने के
आन्दोलन को रोके हुए है | ये वे लोहग है जो बाबा साहेब का मुखोटा पहन कर, उनका नाम
लेकर भारत के लोगो को गुमराह कर रहे है और आपनी राजनितिक रोटी सेक रहे है | इन
लोगो के कारण की भारत में बुद्धिष्ट
डाँक्टर बाबा साहेब आम्बेडकर द्वारा चलाया गया विधित धर्मान्तरण आन्दोलन को
रोका गया है | जिसके कारण लोग कानूनन बुद्धिष्ट बनने से वंचित हो गये | पहले देश
का संविधान उसके बाद धर्म (धम्म)
का ज्ञान |
आप लोगो से निवेदन है कि भारतीय कानून का
पहले पालन करते हुये, कानूनन बौद्ध भिक्षु या कानूनन बुद्धिष्ट व्यक्ति से ही
धर्मान्तरित दिक्षा लेकर विधिवत बौद्ध बने और भिक्षु डाँक्टर बाबा साहेब आम्बेडकर
के द्वारा दिए गये जातिविहीन, बुद्धधर्म को आपना कर अपना और देश के प्रत्येक मानव
का कल्याण करे, इस देश में समानता, स्वतंत्रता, बंधुता की भावनाओ का प्रचार और
प्रसार करे |
तथागत भगवान बुद्ध ने हमें पंचशील देकर
आर्य सत्य का ज्ञान कराया, आर्य अषटांगिक मार्ग बताया जो अंध विश्वास, ढोंग
ढकोसला, जाती पति, ऊँच नीच, रुढ़िवाद, आत्मा परमात्मा, स्वर्ग, नर्क से छुटकारा
दिलाया जो समता, समानता पर आधारित है तथा हमें प्रज्ञा, शील, करुणा का सन्देश दिया
| ऐसे तथागत जे धम्म को हम स्वीकार कर एक स्वाभीमानी बौद्ध बने, क़ानूनी बौद्ध बने,
क़ानूनी बौद्ध लिखे, बौद्ध लिखे सभी बुद्धिष्ट डाँक्टर बाबा साहेब आम्बेडकर का
बौद्धमय भारत का सपना पूरा होगा |
उच्च
वर्ग बौद्ध समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष आर. एच. बौद्ध, के मार्ग दर्शन में
बोद्धिष्ट मार्ग दर्शन में बुद्धष्ट डाँक्टर बाबा साहेब आम्बेडकर के वास्तविक मिशन
को पूरा करने में हमारा सहयोग प्राप्त करे |
अनाथ पिंडक जैसे
दानी न होगा, सम्राट आशोक का मानी न होगा I
बुद्धिष्ट डाँक्टर
बाबा साहेब आम्बेडकर जैसे ज्ञानी न होगा, बुद्ध धम्म अमृत जैसा पानी न होगा I
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