"अंत नहीं... अनंत "
कभी-कभी ऐसा लगता है ...!
जब मुझे पर्याप्त आत्मविश्वास मिलेगा ,
मंच खत्म हो चुका होगा ।
जब मुझे हार का यकीन हो जाएगा ,
तब मैं जीत चुका होऊंगा ।
जब मुझे लोगों की जरूरत होगी ,
वो मुझे छोड़ दिया होगा ।
कभी-कभी ऐसा लगता है ...!
जब रोते हुए मेरे आंसू सूख जाएंगे ,
मुझे सहारे के लिए कंधा मिल जाएगा ।
जब मैं नफरत की दुनिया में ,
जीना सीख लूंगा ।
मुझे दिल की गहराई से प्यार करना ,
शुरू कर देगा ।।
कभी-कभी ऐसा लगता है ...!
जब इंतजार करते-करते सोने लगूंगा ,
तब कहीं सूर्य निकल आएगा ।
यही जिंदगी है ...!
कोई फर्क नहीं पड़ता ,
मैं कोई योजना बना रहा हूं ।
सफलता आपका दुनिया से परिचय कराती है ।
असफलता आपको दुनिया का ...।।
अक्सर मैं आशा खो देता हूं ...,
लगता है यही अंत है !
भगवान ऊपर से मुस्कुराते हैं और कहते हैं ,
जिंदगी में शालीनता हो ...,
जिस तरह मैं शालिग्राम हूं ।
शांत रहो वत्स ...!
तथास्तु ...!
यह सिर्फ मोड है ...,
अंत नहीं है ...!
अनंत है ...!!
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