गौतम बुद्ध की वैज्ञानिक दिशा में सबसे बड़ी और मौलिक स्थापना कारण - कार्य सिद्धांत है। अर्थात कारण ही कार्य का जन्मदाता है। अकारण कुछ भी नहीं होता है और न हो सकता है।

गौतम बुद्ध ने जिस कारण - कार्य सिद्धांत की बुनियाद को छठी सदी ईसा पूर्व में डाला था, उसे समझने में यूरोप को पूरे दो हजार साल से भी अधिक समय लग गए।

पूरे यूरोप में इसे सबसे पहली बार सोलहवीं सदी में फ्रांसीस बेकन ( 1561 - 1626 ) ने लिखा और समझाया कि जो व्यक्ति ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें सबसे पहले घटनाओं का अध्ययन कारण सहित करना चाहिए, तब सिद्धांत बनाकर उन्हें प्रयोगात्मक जाँच करनी चाहिए।

बुद्धिज्म का जो थेर है, वहीं अंग्रेजी में थ्योरी है। इसीलिए बुद्ध की शिक्षाओं को सिद्धांत कहा जाता है।

यूरोप में जब कारण - कार्य के प्रति चेतना फ्रांसिस बेकन ने फैलाई, तब जाकर गैलिलियो, केपलर और न्यूटन पैदा हुए।

ज्ञान की दुनिया में बुद्ध बेमिसाल हैं।

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