*बुध्दानुसती*
*इतिपि सो भगवा अरहं, सम्मासम्बुध्दो, विज्जा-चरण सम्पन्नो, सुगतो, लोकविदु, अनुत्तरो, पुरिस-दम्मसारथी, सत्था देव-मनुस्सानं, बुध्दो, भगवा ति ।।*
*बुद्धानुसति* = बुद्ध के गुणों को श्रद्धा पुर्वक स्मरण करते हुए अपने आपको को धम्म मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते रहना ।
*बुद्ध के 9 गुण
1) *भगवा,* = भगवान - तृष्णा को भंग(भग्न) करने वाला मनुष्य *भगवान*
2) *अरहं* =अरहंत - अर=अरी= शत्रु(तृष्णा) ,
हंत = अंत करना- अर्थात
जो अपने शत्रु (तृष्णा) का अंत करता है, उसे *अरहंत* कहते है।
3) *सम्मा सम्बुद्धो*,
सम्मा - सम्यक = सर्व श्रेष्ठ
सम्बुध्द- संपुर्ण जागृत ज्ञान (प्रज्ञा) से परिपूर्ण
*सम्यक सम्बुध्द*
4) *विज्जाचरण संपन्नो* = विद्या और आचरण में संपन्न ।
*विज्जा* = विद्या = जिसकी अविद्या (अज्ञान) पुरी तरह नष्ट हो चुकी है, ऐसे व्यक्ति को विद्यावान (विद्वान) कहते हैं ।
*विज्जा* = विद्या = जिसे पटिच्चसमुप्पादो (प्रतित्य समुत्पाद) का अनुभूति जन्य ज्ञान ।
*विज्जा* = विद्या = चार आर्य सत्यों का अनुभूति जन्य ज्ञान ।
5) *सुगतो* : सुगति (सद्गति) प्राप्त,
सभी गतियों के परे पहुँचा हुआ,
और लोगों को सुगति (अच्छी गति) के बारे में मार्गदर्शन करने वाला ।
6) *लोकविदू* = सभी लोकों के जानकार ।
*लोक* = शरीर और चित्त प्रपंच के मिली जुली जीवन धारा ।
*विदू* = लोगों में सबसे बडे़ विद्वान, जानकार ।
कर्म, कर्म-बीज, कर्म-संस्कार, कर्म-विपाक (कर्म-फल) के रहस्य को जानने वाले,
कौन से कर्म से कहाँ जन्म होता है, उस से मुक्त कैसे हो सकते है, इसके जानकार ।
7) *अनुत्तरो* = सर्वश्रेष्ठ ।
8) *पुरिस-दम्म सारथी* = गलत मार्ग पर चलने वाले (भवचक्र में उलझे हुए) लोगोंको सही मार्ग पर (मुक्ति के मार्ग पर) लाने वाले अनुपम सारथी ।
9) *सत्था देव-मनुस्सानं* = देवताओं और मनुष्यों के गुरु शास्ता ।
*इतिपि सो भगवा अरहं, सम्मासम्बुध्दो, विज्जा-चरण सम्पन्नो, सुगतो, लोकविदु, अनुत्तरो, पुरिस-दम्मसारथी, सत्था देव-मनुस्सानं, बुध्दो, भगवा ति ।।*
*बुद्धानुसति* = बुद्ध के गुणों को श्रद्धा पुर्वक स्मरण करते हुए अपने आपको को धम्म मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते रहना ।
*बुद्ध के 9 गुण
1) *भगवा,* = भगवान - तृष्णा को भंग(भग्न) करने वाला मनुष्य *भगवान*
2) *अरहं* =अरहंत - अर=अरी= शत्रु(तृष्णा) ,
हंत = अंत करना- अर्थात
जो अपने शत्रु (तृष्णा) का अंत करता है, उसे *अरहंत* कहते है।
3) *सम्मा सम्बुद्धो*,
सम्मा - सम्यक = सर्व श्रेष्ठ
सम्बुध्द- संपुर्ण जागृत ज्ञान (प्रज्ञा) से परिपूर्ण
*सम्यक सम्बुध्द*
4) *विज्जाचरण संपन्नो* = विद्या और आचरण में संपन्न ।
*विज्जा* = विद्या = जिसकी अविद्या (अज्ञान) पुरी तरह नष्ट हो चुकी है, ऐसे व्यक्ति को विद्यावान (विद्वान) कहते हैं ।
*विज्जा* = विद्या = जिसे पटिच्चसमुप्पादो (प्रतित्य समुत्पाद) का अनुभूति जन्य ज्ञान ।
*विज्जा* = विद्या = चार आर्य सत्यों का अनुभूति जन्य ज्ञान ।
5) *सुगतो* : सुगति (सद्गति) प्राप्त,
सभी गतियों के परे पहुँचा हुआ,
और लोगों को सुगति (अच्छी गति) के बारे में मार्गदर्शन करने वाला ।
6) *लोकविदू* = सभी लोकों के जानकार ।
*लोक* = शरीर और चित्त प्रपंच के मिली जुली जीवन धारा ।
*विदू* = लोगों में सबसे बडे़ विद्वान, जानकार ।
कर्म, कर्म-बीज, कर्म-संस्कार, कर्म-विपाक (कर्म-फल) के रहस्य को जानने वाले,
कौन से कर्म से कहाँ जन्म होता है, उस से मुक्त कैसे हो सकते है, इसके जानकार ।
7) *अनुत्तरो* = सर्वश्रेष्ठ ।
8) *पुरिस-दम्म सारथी* = गलत मार्ग पर चलने वाले (भवचक्र में उलझे हुए) लोगोंको सही मार्ग पर (मुक्ति के मार्ग पर) लाने वाले अनुपम सारथी ।
9) *सत्था देव-मनुस्सानं* = देवताओं और मनुष्यों के गुरु शास्ता ।
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