मै बोलना नहीं , पुकारना चाहता हूँ।
.
क्या आप सुनेंगे ?
क्या आप आज्ञा देंगे कि मै आपकी नींद को तोडूं और आपके स्वप्नो को खंड़ित करुं ?
यह भी हो सकता है कि जो स्वप्न आप देख रहे होँ , वे बहुत सुखद हो , पर जो स्वप्न सुखद होते हैँ वे ही घातक होते है ,
क्यो कि वे जागने नही देते है ,
और नींद की मादकता को और घना करते है ।
मैं स्वयं जागकर जो आनंद अनुभव कर रहा हुं ,उसमें आपको भी साझीदार बनाना चाहता हुं । इसलिए तय किया है कि आपको पुकारुंगा ।
आपसे बोलुंगा ही नही ,आपको बुलाउंगा भी ।
यह पुकार आपकी तंद्रा तोड़ दे और आतके स्वप्नो के धुंए को तितर - बितर कर दे , तो मुझे क्षमा करना ।
मै असमर्थ हूं । स्वप्न तोड़े बिना सत्य के संबंध मेँ कुछ भी नही कहा जा सकता है ।
एक निद्रा हमें घेरे हुए है । इस निद्रा के बने रहते हमारा कुछ भी करना सार्थक नही है ।
उसके बने रहते हम जो भी करे , वह सब करना , वह सब जानना स्वप्न में है ।
सर्वप्रथम बात निद्रा से जागना है ।शेष सब उसके बाद है ।
उसके पुर्व कुछ भी नही है ।
बुद्धा
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क्या आप सुनेंगे ?
क्या आप आज्ञा देंगे कि मै आपकी नींद को तोडूं और आपके स्वप्नो को खंड़ित करुं ?
यह भी हो सकता है कि जो स्वप्न आप देख रहे होँ , वे बहुत सुखद हो , पर जो स्वप्न सुखद होते हैँ वे ही घातक होते है ,
क्यो कि वे जागने नही देते है ,
और नींद की मादकता को और घना करते है ।
मैं स्वयं जागकर जो आनंद अनुभव कर रहा हुं ,उसमें आपको भी साझीदार बनाना चाहता हुं । इसलिए तय किया है कि आपको पुकारुंगा ।
आपसे बोलुंगा ही नही ,आपको बुलाउंगा भी ।
यह पुकार आपकी तंद्रा तोड़ दे और आतके स्वप्नो के धुंए को तितर - बितर कर दे , तो मुझे क्षमा करना ।
मै असमर्थ हूं । स्वप्न तोड़े बिना सत्य के संबंध मेँ कुछ भी नही कहा जा सकता है ।
एक निद्रा हमें घेरे हुए है । इस निद्रा के बने रहते हमारा कुछ भी करना सार्थक नही है ।
उसके बने रहते हम जो भी करे , वह सब करना , वह सब जानना स्वप्न में है ।
सर्वप्रथम बात निद्रा से जागना है ।शेष सब उसके बाद है ।
उसके पुर्व कुछ भी नही है ।
बुद्धा
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