ऑख आक्रामक है, यह पुरुष उर्जा है ।
कान ग्राहक है, सिर्फ स्वीकार करता है । कान एक गर्भ है,
यह स्त्री उर्जा है । मुझसे यदि पूछो तो वह जो परम अनुभव है,
दृष्टा और श्रोत्रा का मिलन है वहा । वहा ऑख और कान एक हो जाते है ।
वहा ऑख सुनती है, कान देखते है । वहा अपूर्व तिलिस्मी घटित होता है ।
वहा प्रकाश भी है, लेकिन मुर्दा नही है – नाचता हुआ है ।
प्रकाश के हाथो मे बॉसुरी है – प्रकाश बज रहा है ।
प्रकाश छंदबध्द है ! इस छंदबध्दता की प्रतीति को ही शब्द कहा है ।
कान ग्राहक है, सिर्फ स्वीकार करता है । कान एक गर्भ है,
यह स्त्री उर्जा है । मुझसे यदि पूछो तो वह जो परम अनुभव है,
दृष्टा और श्रोत्रा का मिलन है वहा । वहा ऑख और कान एक हो जाते है ।
वहा ऑख सुनती है, कान देखते है । वहा अपूर्व तिलिस्मी घटित होता है ।
वहा प्रकाश भी है, लेकिन मुर्दा नही है – नाचता हुआ है ।
प्रकाश के हाथो मे बॉसुरी है – प्रकाश बज रहा है ।
प्रकाश छंदबध्द है ! इस छंदबध्दता की प्रतीति को ही शब्द कहा है ।
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