जो सभ्यता जिनकी साँसों में बसी है, उस सभ्यता का बेहतर इतिहास वहीं लिख सकते हैं।

सोहगौरा ताम्रपत्र पर अंकित दो प्रतीकों से बतौर उदाहरण इसे समझा जा सकता है।

सोहगौरा ताम्रपत्र का पहला प्रतीक बोधिवृक्ष है, मगर इतिहासकार ने इसे वेदिका में वृक्ष बताए हैं। वे बोधिवृक्ष बताने में शरमा रहे हैं।

चौथे प्रतीक को इतिहासकार ने मेरु पर्वत पर चंद्रमा बताए हैं, जबकि वह बोधिचैत्य का प्रतीक Three arched hill symbol है।

प्रतीकों की गलत प्रस्तुति जारी है।

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