बौद्ध सभ्यता और कला ने कई राजवंशों तथा राजाओं के इतिहास को गर्त में डूबने से बचा लिया है।
उदाहरण के लिए, एक था इखाकु राजवंश ( इक्ष्वाकु राजवंश )।
इखाकु राजवंश का शासन तीसरी-चौथी सदी में पूरबी कृष्णा नदी की घाटी में ( आंध्र प्रदेश ) था।
इनकी राजधानी विजयपुरी में थी। विजयपुरी को ही आज नागार्जुनकोंडा कहा जाता है।
यह नागार्जुनकोंडा है, जहाँ से पहली बार चीन के होने का पहला पुरातात्विक सबूत मिलता है।
नागार्जुनकोंडा बौद्ध स्थल है। इखाकु राजाओं ने यहाँ अनेक बौद्ध स्तूप और विहार बनवाए हैं।
इखाकु राजपरिवार की सभी स्त्रियाँ बौद्ध थीं, जिनके नाम के अंत में " सिरि ( श्री ) " मिलता है, जैसे अडविचाट सिरि, कोदबबलि सिरि, हम्म सिरि आदि।
बौद्ध होने की हैसियत से इन स्त्रियों ने अनेक बौद्ध इमारतें बनवाई हैं, जिनके नाम शिलालेखों पर अंकित हैं।
यदि यह बौद्ध सभ्यता और कला आज जीवित नहीं होती तो ये सभी राजा - रानी इतिहास के गर्त में डूब जाते।
इखाकु राजाओं का शासन कोई 100 साल रहा। मगर इस राजवंश के सबसे प्रतापी राजा सिरि विर पुरिसदत थे।
इखाकु राजाओं के शासन के पूरे 100 साल में विर पुरिसदत का कोई 20 साल का शासन बौद्ध सभ्यता और कला की दृष्टि से स्वर्ण युग ( गोल्डेन एज ) माना जाता है।
नागार्जुनकोंडा का पता 1926 में एक स्कूल टीचर ने किए थे। मगर 1882 में ही एक दूसरे बौद्ध स्थल जग्गय्यपेट से हमें इखाकु वंश का पता पहले चल चुका था।
उदाहरण के लिए, एक था इखाकु राजवंश ( इक्ष्वाकु राजवंश )।
इखाकु राजवंश का शासन तीसरी-चौथी सदी में पूरबी कृष्णा नदी की घाटी में ( आंध्र प्रदेश ) था।
इनकी राजधानी विजयपुरी में थी। विजयपुरी को ही आज नागार्जुनकोंडा कहा जाता है।
यह नागार्जुनकोंडा है, जहाँ से पहली बार चीन के होने का पहला पुरातात्विक सबूत मिलता है।
नागार्जुनकोंडा बौद्ध स्थल है। इखाकु राजाओं ने यहाँ अनेक बौद्ध स्तूप और विहार बनवाए हैं।
इखाकु राजपरिवार की सभी स्त्रियाँ बौद्ध थीं, जिनके नाम के अंत में " सिरि ( श्री ) " मिलता है, जैसे अडविचाट सिरि, कोदबबलि सिरि, हम्म सिरि आदि।
बौद्ध होने की हैसियत से इन स्त्रियों ने अनेक बौद्ध इमारतें बनवाई हैं, जिनके नाम शिलालेखों पर अंकित हैं।
यदि यह बौद्ध सभ्यता और कला आज जीवित नहीं होती तो ये सभी राजा - रानी इतिहास के गर्त में डूब जाते।
इखाकु राजाओं का शासन कोई 100 साल रहा। मगर इस राजवंश के सबसे प्रतापी राजा सिरि विर पुरिसदत थे।
इखाकु राजाओं के शासन के पूरे 100 साल में विर पुरिसदत का कोई 20 साल का शासन बौद्ध सभ्यता और कला की दृष्टि से स्वर्ण युग ( गोल्डेन एज ) माना जाता है।
नागार्जुनकोंडा का पता 1926 में एक स्कूल टीचर ने किए थे। मगर 1882 में ही एक दूसरे बौद्ध स्थल जग्गय्यपेट से हमें इखाकु वंश का पता पहले चल चुका था।


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