आंध्र प्रदेश के पुरातत्व विभाग ने चट्टान पर बने धम्मचक्र का पता लगाया है। यह धम्मचक्र पूर्वी गोदावरी जिला के कोठापल्ली गाँव से मिला है। गोदावरी का गोदा नदी का और कोठापल्ली का पल्ली गाँव का बोधक है।
खोजे गए धम्मचक्र में 32 तीलियाँ हैं। 32 तीलियों का प्रयोग सारनाथ के सिंह स्तंभ तथा साँची के स्तूप पर भी हुआ है।
इधर के बर्षों में 32 तीलियों वाला यह भारत का तीसरा धर्मचक्र मिला है। इसके पहले 32 तीलियों वाला एक धम्मचक्र पत्थर का बना हुआ कनगनहल्ली - सन्नति ( कर्नाटक) से और दूसरा टेराकोटा का बना हुआ लुंबिनी ( नेपाल ) से मिल चुका है।
कोठापल्ली का धम्मचक्र एक बड़ी चट्टान पर बना है। बगल में ब्राह्मी लिपि में लिखा अभिलेख है। यह धम्मचक्र स्वतंत्र नहीं बल्कि एक बौद्ध चित्रण पट्टिका का चट्टानी हिस्सा है।
कोठापल्ली से अनेक बौद्ध अवशेष मिले हैं। पत्थर के बने 4 विभिन्न प्रकार के स्तूप भी मिले हैं।
कोठापल्ली के बौद्ध अवशेषों को पुरातात्त्विकों ने पूर्व सातवाहन काल से लेकर सातवाहन काल के बीच का माना है।
खोजे गए धम्मचक्र में 32 तीलियाँ हैं। 32 तीलियों का प्रयोग सारनाथ के सिंह स्तंभ तथा साँची के स्तूप पर भी हुआ है।
इधर के बर्षों में 32 तीलियों वाला यह भारत का तीसरा धर्मचक्र मिला है। इसके पहले 32 तीलियों वाला एक धम्मचक्र पत्थर का बना हुआ कनगनहल्ली - सन्नति ( कर्नाटक) से और दूसरा टेराकोटा का बना हुआ लुंबिनी ( नेपाल ) से मिल चुका है।
कोठापल्ली का धम्मचक्र एक बड़ी चट्टान पर बना है। बगल में ब्राह्मी लिपि में लिखा अभिलेख है। यह धम्मचक्र स्वतंत्र नहीं बल्कि एक बौद्ध चित्रण पट्टिका का चट्टानी हिस्सा है।
कोठापल्ली से अनेक बौद्ध अवशेष मिले हैं। पत्थर के बने 4 विभिन्न प्रकार के स्तूप भी मिले हैं।
कोठापल्ली के बौद्ध अवशेषों को पुरातात्त्विकों ने पूर्व सातवाहन काल से लेकर सातवाहन काल के बीच का माना है।

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