सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर गौतम बुद्ध तक और बाद में भी भारत में कोई बड़ा ब्राह्मण - साम्राज्य स्थापित नहीं हुआ।

शिशुनाग वंश, नाग वंश, नंद वंश, मौर्य साम्राज्य, गुप्त साम्राज्य से लेकर मुगल साम्राज्य और अंग्रेजी राज तक सभी के सभी ब्राह्मणेतर ही थे।

यदि बीच - बीच में ब्राह्मणों द्वारा जो छोटे - छोटे राज्य स्थापित हुए, वे अत्यंत संकुचित और सिकुड़े हुए थे, जिसे आप साम्राज्य नहीं कह सकते हैं। मिसाल के तौर पर शुंग वंश, कण्व वंश आदि।

गुप्त वंश के बाद में जो महत्वपूर्ण वंश भारत में स्थापित हुआ, वह वर्धन वंश भी ब्राह्मणेतर ही था। मुस्लिम और अंग्रेजों के समय में भी इनके छोटे - छोटे कुछेक राज्य स्थापित हुए जैसे पेशवाओं का राज, पर राजनीतिक संदर्भ में ब्राह्मण साम्राज्य की स्थापना भारत में कभी नहीं हुई।

दक्षिण भारत के चेर, चोल और पांड्यवंशीय राजे भी जाति के वेल्लाल और शूद्र ही थे।

बगैर राजनीतिक साम्राज्य के सांस्कृतिक साम्राज्य असंभव नहीं है।

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