क्षमा
एक दिन बुद्ध ने भूमि पर घिसटते हुए एक लंगड़े योगी को देखा.
“मैं अपने पापों का फल भोग रहा हूँ” – योगी ने कहा.
“तुमने कितने पापों का फल भोग लिया है?”
“यह तो मैं नहीं जानता”.
“और कितने पापों का फल भोगना शेष है?”
“मैं यह भी नहीं जानता”.
“बस करो. अब रुकने का समय आ गया है. ईश्वर से क्षमा माँगना बंद करो और उनसे क्षमा मांगो जिन्हें तुमने आहत किया”.
एक दिन बुद्ध ने भूमि पर घिसटते हुए एक लंगड़े योगी को देखा.
“मैं अपने पापों का फल भोग रहा हूँ” – योगी ने कहा.
“तुमने कितने पापों का फल भोग लिया है?”
“यह तो मैं नहीं जानता”.
“और कितने पापों का फल भोगना शेष है?”
“मैं यह भी नहीं जानता”.
“बस करो. अब रुकने का समय आ गया है. ईश्वर से क्षमा माँगना बंद करो और उनसे क्षमा मांगो जिन्हें तुमने आहत किया”.
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